Cheque Bounce Rules : भारत में व्यापार और व्यापारियों के लेनदेन में चेक का उपयोग लंबे समय से होता आ रहा है चेक एक भरोसेमंद भुगतान का साधन माना जाता है लेकिन जब चेक बाउंस होता है तो यह न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचता है भवन की कानूनी उलझन और मानसिक तनाव का कारण भी बनता है यदि ऐसे मामले को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम और स्पष्ट फैसला दिया है जिससे व्यापारी और आम नागरिक दोनों को काफी राहत मिलेगी
यह फैसला चेक बाउंस से जुड़े मामलों में अदालत की अधिकारिकता को लेकर वर्षों से चली आ रही भ्रम की स्थिति को समाप्त करता है साथ ही या अनुरूप लेन-देन को सुनिश्चित और पारदर्शित बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है
चेक बाउंस क्या है और यह समस्या क्यों बढ़ रही है !
जब कोई विक्रेता या संस्था भुगतान के लिए जारी किए गए चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर अब पर्याप्त राशि खाता बंद होना या अन्य कारण से dishonour हो जाता है तो उसे चेक बाउंस कहा जाता है आज के समय में व्यापारिक लेनदेन की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ चेक बॉस के मामले भी तेजी से देखने को मिल रहे हैं
अक्सर देखा गया है कि पीडित विक्रियता या समझ नहीं पता है कि उसे कि अदालत में मामला दर्ज करना चाहिए इसे आसमंजस के कारण कई लोग या तो गलत जगह केस दर्ज कर देते हैं या फिर कानूनी प्रक्रिया से ही दूर हो जाते हैं
RBI का नया नियम चेक बाउंस को लेकर
आप सभी को बताते चलें कि पहले जब चेक वापस होता था तो आप लोगों को इसकी जानकारी बहुत देर से मिलती थी इस स्थिति में लोगों से करने में काफी परेशानियां होती थी अब विवाद हुए देखने को मिलता था इस नए नियम के अंतर्गत अब किसी का भी चेक बाउंस होता है तो उसे 24 घंटे के अंदर में बैंक के द्वारा उन्हें SMS या ईमेल के जरिए जानकारी के दिया जाएगा और दोनों पास समय कम पर उठा सकते हैं लताओं से बच्चे रहेंगे
अकाउंट को हो सकते हैं फ्रिज !
बता दे कि नियमों के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति का चेक लगातार तीन बार बाउंस हो जाता है तो बैंक की ओर से उसे अकाउंट को अस्थायि रूप से फ्रिज किया जा सकते हैं। वही यह कदम इसीलिए उठाए गए हैं ताकि भुगतान प्रणाली में अनुशासन बनाए जा सके। आईए और जानते हैं नीचे की लेख में पूरी जानकारी विस्तार से।
चेक बाउंस होने से बचने के तरीके !
बता दे कि कई कर्म के चलते चेक बाउंस की प्रक्रिया होते हैं वहीं अगर चेक बाउंस होने से बचना चाहते हैं तो खाते में पर्याप्त बैलेंस रखें जिससे चेक बाउंस की प्रक्रिया न हो। वहीं इसके साथ ही चेक पर तारीख और प्राप्तकर्ता का नाम सही तरीके से भरे ताकि चेक बाउंस न हो।
चेक बाउंस पर सजा के प्रावधान !
आप सभी को बता दें कि चेक बोन से सोना एक कानूनी अपराध माना जाता है वहीं नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत धारा 138 के तहत चेक बाउंस होने पर जुर्म माना जाता है
वही इस एक्ट के तहत व्यक्ति को 2 साल तक की जय चेक की राशि के डूबने तक का जुर्माना कोर्ट फीस और कानूनी खर्च जैसा सजा हो सकता है वहीं सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि ₹100 से 750 तक का जुर्माना भी वसूला जा सकता है